
काली रात की खामोशी भी गुनगुनाती है जब अंधेरी रातों में चांद बादल से छांक रौशनी बिखेरता है…तब दिल पूछता है किस जहां में रहते हो तुम....क्या वहां भी है कोई जमीं घर बनाने को...है ऐसा तो बता देना तुम्हें तन्हा नहीं रहने दूंगी...क्यों हंस रहे हो मेरी इस ख्वाहिश पर या जान गए हो मेरे इस छल को...हां तुम्हें देख स्वार्थी तो हो गई हूं पर क्या छलना सिर्फ तुम्हे ही आता है...............................
मेरे स्टोररूम में पहला सामान मेरे इन्हीं पलों का है...अभी बीते दिनों जंगल और पहाड़ों की दुनिया से लौटी हूं...दिल्ली की हाईटेक जिंदगी से उत्तराखंड के पहाड़ो तक का सफर बेहत रोमांचकारी था...दिल्ली से काठगोदाम एक नींद के फासले भर का था...शाम के शोर शराबे के बाद का मुकाम इतना शांती भरा था के मानो ऐसा लग रहा हो के पक्षियों की भाषा भी समझ आने लगी है...खैर इसके बाद हमें काठगोदाम से धौलछीना तक का सफर तय करना था जहां हमारे होटल की बूकिंग थी...टैक्सी ढूंढने में थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी...आखिरकार ये भी तो एक बाजार था जहां मुट्ठी बंद करने को पैसे लगते हैं...खैर टैक्सी मिली...सर्द हवाएं गुदगुदा रही थी....धीरे धीरे मौसम बैमान सा होता गया और सूरज का जोशो खरोश पसीने बहाने लगा...काठगोदाम से धौलछीना तक का सफर काफी थका देने वाला था...बस होटल पहूंचने का इंतजार कर रहे थें...हाईटेक दुनिया का रंग थोड़ा बहुत तो हम पर भी चढ़ ही गया है...जो हमारी प्रकृति प्रेम की भावनाओं को थोड़ा इम्प्योर ही रहने देती है...रुकते थकते चलते हम धौलछीना पहूंच ही गए...हमारे सफर का ये स्टॉपेज कुछ ऐसा था के लगा जैसे समय के परे जिंदगी थक के आराम करना चाह रही हो....इन वादियों का नशा हमारी थकान और नींद के मद पर हावी था.....जिस होटल में बूकिंग थी वो तस्वीरों से भी ज्यादा खूबसूरत था...बिल्कुल पहाड़ो और जंगलो के बीच था ये हो़टल ‘Binsar Eco Camp’ ।
जंगल और पहाड़ों के बीच बसे इस होटल की खासियत सिर्फ इसकी रूम सर्विस ही नहीं बल्कि यहां की मेहमान नवाजी का अंदाज भी खास था...आते के साथ ही हमारा स्वागत गर्मा गर्म चाय से हूई...सोने के बजाय हम बहुत देर तक बाल्कनी में बैठे रहें जहां पहाड़ और जंगल का नज़ारा मस्ती का ऐहसास करा रहे थे थोड़ी देर बाद हमारे नहाने के लिए बाल्टियों में गर्म पानी आया...दिन तो बस होटल की खूबसूरती देखने और फ्रेश होने में निकला...शाम होते ही हमने पहाड़ो की ट्रेकिंग का प्लान बनाया...मैं पहली बार पहाड़ पर चढ़ी थी...इसका रास्ता होटल से ही सटा हुआ था...
जंगल और पहाड़ों के बीच बसे इस होटल की खासियत सिर्फ इसकी रूम सर्विस ही नहीं बल्कि यहां की मेहमान नवाजी का अंदाज भी खास था...आते के साथ ही हमारा स्वागत गर्मा गर्म चाय से हूई...सोने के बजाय हम बहुत देर तक बाल्कनी में बैठे रहें जहां पहाड़ और जंगल का नज़ारा मस्ती का ऐहसास करा रहे थे थोड़ी देर बाद हमारे नहाने के लिए बाल्टियों में गर्म पानी आया...दिन तो बस होटल की खूबसूरती देखने और फ्रेश होने में निकला...शाम होते ही हमने पहाड़ो की ट्रेकिंग का प्लान बनाया...मैं पहली बार पहाड़ पर चढ़ी थी...इसका रास्ता होटल से ही सटा हुआ था...
इसी वक्त मैने देखा के पानी गर्म करने के लिए एक ड्रम को पहाड़ से लगाया गया है जिसमें पानी पहाड़ो के रास्ते आ रहा है और इसके नीचे लकड़ियों को जला कर इसे गर्म करने का काम हो रहा है...ये टेक्नॉलोजी पहाड़ों की देन थी।
पहाड़ो की चढ़ाई हमारे लिए मुश्किल थी साथ ही पाइन के पत्ते हमारा पांव रोक रहे थे...लेकिन रेत से इन पलों को अपना बना लेने की धुन हमें ऊपर तक ले गई...जहां से दुनिया को ऊपर से देखने का मजा ही कुछ और था...उन पलों को थामें हुए भी हमें उनके छूट जाने का अफसोस था...लेकिन हमारा कैमरा आने वाले हर दिन इस भ्रम का ऐहसास कराएगा...हंसने को हम तो कभी कभी भ्रम भी पाल लिया करते हैं...वो पल न सही लेकिन ऐहसास जी उठेंगे। इमोशनल होना थोड़ा जरूरी है...क्योंकि इन पलों का मज़ा जीने में है देखने में नहीं...खैर धौलछीना हमें पहाड़ों और जंगलों की दुनिया नज़र आई यूं ही हमने अपने तीन दिन बिता दिए। अगला डेस्टीनेशन था नैनीताल,,,

पहाड़ो की चढ़ाई हमारे लिए मुश्किल थी साथ ही पाइन के पत्ते हमारा पांव रोक रहे थे...लेकिन रेत से इन पलों को अपना बना लेने की धुन हमें ऊपर तक ले गई...जहां से दुनिया को ऊपर से देखने का मजा ही कुछ और था...उन पलों को थामें हुए भी हमें उनके छूट जाने का अफसोस था...लेकिन हमारा कैमरा आने वाले हर दिन इस भ्रम का ऐहसास कराएगा...हंसने को हम तो कभी कभी भ्रम भी पाल लिया करते हैं...वो पल न सही लेकिन ऐहसास जी उठेंगे। इमोशनल होना थोड़ा जरूरी है...क्योंकि इन पलों का मज़ा जीने में है देखने में नहीं...खैर धौलछीना हमें पहाड़ों और जंगलों की दुनिया नज़र आई यूं ही हमने अपने तीन दिन बिता दिए। अगला डेस्टीनेशन था नैनीताल,,,

ये जगह भी बेहद सुंदर थी और साथ ही थोड़ी कमर्शियलाइज़्ड...लेकिन अगर आप लड़की हैं तो ये जगह भी आपको बुरी नहीं लगेगी...झील के किनारे बसी ये दुकानें लड़कियों के दम पर ही तो चलती है...सही मायनों में कहें तो हमारी भी गलती नहीं है...दरअसल इन दुकानों में लड़कों के लिए जगह थोड़ी कम है...वैसे अगर ये जगह कमर्शियलाइज्ड नहीं होती तो हम बोटिंग का लुत्फ नहीं उठा पाते। झील से ऊपर देखने पर दर्जनों होटल दिख जाते थे...लगता था किसे खूबसूरत कहें जमीं को या आसमां को....इंसान भी अजीब है वो जहां होता है वहां से दिखाई देने वाली दूसरी जगह ही उसे लुभाती है...ये दो मुट्ठी हमेशा ठगी सी ही रह जाती है।
ये पूरा सफर शायद अधूरा ही रह जाता...अगर मैं हम नहीं होती।।।

ये पूरा सफर शायद अधूरा ही रह जाता...अगर मैं हम नहीं होती।।।

Love You Sweetheart……………

Wonderful pics. Although am not able to read the text in my mobile... my mob is not supporting the devnagri font.
ReplyDeleteBut the first thing i'll do when im on my pc would read this story...
Nishu..
ReplyDeleteHonestly, Your Store-Room must be Loaded with Beautiful Appreciations and not with Comments..
A Beautiful Painting wud only Look Beautiful in the Eyes of a Beautiful Painter Just as your Write-Ups Wud only Be Appreciated Truly with a Ink of a Honest and Best Writers of The World..Like Me..Jokes Apart..
..Awesome..Excellent Work..Keep It Up..& All The Very Best In Life.